राज्यपाल रमेन डेका ने पत्रकारिता विश्वविद्यालय को दिया मंत्र “अनसंग हीरो”
शाहिद अली
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं इसलिए उच्च शिक्षा के प्रति उनमें एक सच्चा भाव भी है। विश्वविद्यालयों की शिक्षा में गुणवत्ता और पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की अभिरुचि के साथ संख्या में मात्रात्मक वृद्धि को वे ज़रुरी मानते हैं लेकिन इससे भी ज्यादा जरुरी वे यह मानते हैं कि विश्वविद्यालयों का योगदान हमारे समाज में ‘अनसंग हीरो’ की पहचान करना और उस आदर्श को अपनी जिंदगी में ढालना भी होना चाहिये।
राज्यपाल श्री रमेन डेका जी ने अपनी ये भावनाएं उस वक्त बयां की जब वे कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। श्री डेका जी के विचारों में अनसंग हीरो जो समाज को नई दिशा देता है लेकिन ऐसे नायकों का नाम लोगों के स्मरण में नहीं रहता है। अनसंग हीरो वो व्यक्ति है जिसने देश, समाज या किसी बड़े बदलाव के लिए बहुत बड़ा काम किया, लेकिन उसे वो पहचान, सम्मान या जगह नहीं मिली जिसका वो हकदार था। अनसंग हीरो के काम का असर बहुत लोगों पर पड़ता है लेकिन लोग उसका नाम नहीं जानते। ऐसे व्यक्ति किसी प्रसिद्धि के लिए नहीं बल्कि कर्तव्य समझकर अपने काम को करते हैं। ऐसे अनसंग हीरो इतिहास की चर्चा में, किताबों, फिल्मों या मीडिया में भी उनका जिक्र बहुत कम मिलता है। जो हमारे समाज का हीरो है वह अनसुना है इसलिए उन्हें सुनने और समझने पर श्री रमेन डेका जी बल देते हैं। किसी विश्वविद्यालय के संदर्भ में इससे बड़ी प्रेरणा शायद ही कभी मिले जो श्री रमेन डेका जी ने व्यक्त की है।
हालांकि पत्रकारिता विश्वविद्यालय में उनके संबोधन ने नए प्राण फूंके हैं। संसाधनों की सीमितता और एआई टेक्नोलॉजी के हस्तक्षेप से पत्रकारिता में उभर रही चुनौतियां आज एक गंभीर विषय है। शिक्षा के क्षेत्र में एआई के परिणामों को लेकर चिंताएं बढ़ी है। एआई के उपयोगों और सावधानियों को लेकर सबसे ज्यादा विमर्श उच्च शिक्षा के केन्द्र में है।

प्रदेश के एकमात्र पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.मनोज दयाल जी ने बड़ी संजीदगी से इस विषय को समझा और भविष्य में एआई के प्रयोगों और परिणामों को लेकर विश्वविद्यालय में एक शोध केंद्र की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प लिया तथा राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका जी के प्रेरणा से इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ा दिया। इस विमर्श की पृष्ठभूमि में श्री रमेन डेका जी ने छत्तीसगढ़ की साहित्यिक पत्रकारिता के पुरोधा माधवराव सप्रे जी का स्मरण कर चौथे स्तंभ की भूमिका को काफी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पत्रकारिता में सत्यता को परखे बिना आरोपों पर आधारित तथ्यहीन खबरों से उत्पन्न किसी की फैमिली और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति भी सजगता से सही दिशा में काम करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर गैर जिम्मेदाराना रवैए को लेकर भी चिंता जाहिर की। श्री डेका जी ने मीडिया में यह जरूरी है कि हमें अपने कार्य के दौरान अंंर्तरात्मा की आवाज को जरुर सुनना चाहिए।
पत्रकारिता विश्वविद्यालय अपने तीसरे दशक में आगे बढ़ रहा है। इसके विकास को लेकर जन-अपेक्षाएं विशेषकर मीडिया शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और पत्रकारों में ज्यादा हैं। मीडिया इंडस्ट्रीज़ ऐसे प्रशिक्षित युवा शक्ति की मांग करती है जिनमें मीडिया प्रोफेशनल होने का सर्वगुण हों। विश्वविद्यालय से डिग्री लेकर निकलने वाला पूरी तरह से कौशल युक्त हो। उसमें मीडिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को पहचानने और रफ़्तार से बढ़ने का उत्साह हो। राज्यपाल श्री रमेन डेका जी इस विश्वविद्यालय में काफी संभावनाएं देखते हैं और विश्वविद्यालय के विकास के प्रति संवेदनशील भी हैं। ऐसा मानना चाहिए कि उनके सीधे संरक्षण से ही पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नया प्रकाश उदय होगा।






















