मीडिया में कैरियर – डॉ शाहिद अली

मीडिया में आकर्षण है। मीडिया में कैरियर का नया विकल्प युवाओं को खास तरह से आकर्षित कर रहा है। डिजीटल में सिमटती दुनिया अब हर हाथों में कैद है। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने खासतौर पर युवाओं को काफी प्रभावित किया है इसलिए शिक्षा और रोजगार में इसका महत्व बढ़ गया है। पारंपरिक शिक्षा पद्धति और रोजगार की मैकाले पद्धति से अलग कैरियर की डिजीटल राहें निकल पड़ी हैं। मीडिया इनमें से एक बड़ा कैरियर है।
आधुनिक पत्रकारिता का नया संस्करण मीडिया है जिसमें पत्र – पत्रिकाओं के प्रकाशन से लेकर फिल्म, रेडियो, टीवी के प्रसारण का बड़ा उद्योग सोशल मीडिया की उपस्थिति में एक विशाल उद्योग मेला का रुप धारण कर चुका है जिसमें वाणिज्य व्यापार, राजनीति और मनोरंजन का बाजार फल-फूल रहा है। कहें तो आइए इस मीडिया मेले में और अपना आकाश चुन लीजिए। इसमें मुश्किल कुछ नहीं है, केवल सृजन और सर्जन की शिक्षा जरूरी है। आज मीडिया में कैरियर बनाना एक अच्छे नागरिक होने की उपाधि है। भारत सरकार की नई शिक्षा नीति ने सबसे ज्यादा जोर तकनीकी और कौशल से युक्त शिक्षा पर दिया है। मीडिया में विधिवत शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए विश्वविद्यालयों की स्थापनाएं हुई। भारत में मीडिया शिक्षा के चार बड़े केंद्र दिल्ली, भोपाल, जयपुर और रायपुर में खोले गए हैं। दिल्ली में भारतीय जनसंचार संस्थान ( अब विश्वविद्यालय ), भोपाल में प. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, जयपुर में हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय और रायपुर में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय संचालित हैं जिनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों में प्रवेश लेने की होड़ है। ये सभी सरकारी क्षेत्र के विश्वविद्यालय हैं जबकि देश में निजी क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों में भी मीडिया की पढ़ाई हो रही है लेकिन संपूर्णता की दृष्टि से सरकारी क्षेत्रों में संचालित पाठ्यक्रमों में शिक्षा में नवाचार और अनुसंधान की सुविधाएं बड़े स्तर पर हैं। इनमें भी तुलनात्मक रूप से भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय एवं रायपुर में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय को बड़े केंद्र के रूप में देखा जाता है। एक दृष्टि से भारत में मीडिया शिक्षा के दो बड़े तीर्थ भोपाल और छत्तीसगढ़ में ही स्थित हैं।
छत्तीसगढ़ में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय दो दशक पूरे कर नई संभावनाओं को तलाश रहा है। कर्मवीर प.माखन लाल चतुर्वेदी और राष्ट्र शिल्पी कुशाभाऊ ठाकरे जी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालयों के कैंपस युवाओं के सपनों का कंपास है।
सोशल मीडिया में रील्स ने नया उत्साह पैदा किया है। फेसबुक, यूट्यूबर , ट्विटर जैसे सोशल मीडिया का एक नया समाज रच डाला है। दर्पण में एक नहीं कई चेहरे हैं और इन चेहरों में बेपरवाह जिंदगी भी है लेकिन मीडिया शिक्षा में युवाओं की एक ताकतवर दुनिया है जो हमारे समाज को नई दिशा और राष्ट्रबोध दे सकती है। मीडिया में दक्ष प्रतिभाएं रिपोर्टर, एंकर, एडीटर, कंटेंट राइटर, पीआर, एड एजेंसी, प्रोड्यूसर, फिल्म मेकर, रेडियो एनाउंसर, आरजे, न्यूज़ रूम सेवा, पाडकास्ट, ट्रांसलेटर, वायस ओवर जैसे अनेकानेक क्षेत्रों में अपनी क्रिएटिविटी से कैरियर को उड़ान दे सकती हैं जिसके लिए पत्रकारिता के विश्वविद्यालय जाने जाते हैं। पहले यह कहा जाता था कि पत्रकार जन्मजात पैदा होते हैं,अब ये भी कहा जाता है कि हर आदमी अखबार हो गया है। अच्छा तो यह भी है कि हर आदमी खबरदार हो गया है, लेकिन ख़बर के शास्त्र का अध्ययन सही हो जाए तो हम एक सार्थक समाज का सृजन कर सकते हैं। हमें चिंतनशील और संवेदनशील समाज की जरूरत है ऐसा तभी संभव है जब हम मीडिया की तकनीकी युक्त शिक्षा, कैरियर और नैतिक मूल्यों की पाठशाला में पढ़ने जाएं।
(लेखक सुप्रसिद्ध मीडिया शिक्षाविद् एवं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं )

















