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राधा कृष्ण महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बदली अपनी तकदीर


10 जून, बिलासपुर/जिले के तखतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बेलपान की राधा कृष्ण महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, सामूहिक प्रयास और सही अवसर मिलने पर महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। कभी घरेलू कार्यों और खेती-किसानी तक सीमित रहने वाली समूह की पांच महिलाओं ने आज अपनी मेहनत और लगन के दम पर “लखपति दीदी” का गौरव हासिल किया है।
समूह का गठन 21 नवंबर 2019 को हुआ। उस समय समूह की सदस्य महिलाएं केवल घर और खेतों के कामकाज में व्यस्त रहती थीं तथा उनकी कोई विशेष सामाजिक या आर्थिक पहचान नहीं थी। परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने और आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से उन्होंने स्व सहायता समूह का दामन थामा। बिहान योजना के माध्यम से समूह को आरएफ मद से 15 हजार रुपये, सीआईएफ मद से 60 हजार रुपये तथा बैंक से 6 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ।


प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग समूह की महिलाओं ने स्वरोजगार गतिविधियों में किया। उन्होंने हल्दी, मिर्च और अन्य मसालों के प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग का कार्य प्रारंभ किया। इसके साथ ही मुरकू और पापड़ निर्माण जैसे घरेलू उद्योगों को भी व्यवसाय का रूप दिया। गुणवत्ता और मेहनत के बल पर उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई और व्यवसाय ने अच्छी गति पकड़ ली।
आज समूह की गतिविधियों से प्रत्येक माह लगभग 45 से 50 हजार रुपये की आय अर्जित हो रही है। वार्षिक रूप से यह आय लगभग 5.40 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। इस आय ने न केवल समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि उनके परिवारों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा कर रही हैं तथा परिवार की अन्य आवश्यकताओं में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
समूह की महिलाओं का कहना है कि स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा आई है। जो महिलाएं कभी केवल गृहिणी के रूप में जानी जाती थीं, वे आज सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
राधा कृष्ण महिला स्व सहायता समूह की यह उपलब्धि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को अवसर, संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले तो वे अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दे सकती हैं।

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